Detail में जानिये के आखिर Net Neutrality क्या चीज है ? , Detail mein jaaniye ke aakhir net neutrality kya cheej hai ?
Detail में जानिये के आखिर Net Neutrality क्या चीज है ? , Detail mein jaaniye ke aakhir net neutrality kya cheej hai ?

Detail में जानिये के आखिर Net Neutrality क्या चीज है ? | Detail mein jaaniye ke aakhir net neutrality kya cheej hai ?

SEMrush

Detail में जानिये के आखिर Net Neutrality क्या चीज है ? | Detail mein jaaniye ke aakhir net neutrality kya cheej hai ?

 

Net Neutrality क्या है ? Net nutrility kya hai ?

आज कल हम यह शब्द बार बार सुन (listening this word again and again) रहें है. पर हिंदी में इसके बारे हिंदी में लेख कम (very less articles) हैं . मैं आज इन शब्दों के मायने बताने जा रहा हूँ |

  1. नेट न्यूट्रलिटी एक ऐसी अवधारणा है, जिसमें अपेक्षा की जाती है कि यूजर (user), कंटेंट (content), साइट (site), प्लैटफॉर्म (platform), एप्लिकेशन (application) और संचार के तरीकों के आधार पर न तो भेदभाव किया जाए और न ही अलग-अलग शुल्क (different charges) लिया जाए.
  2. इसमें माना ये जाता है कि इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर(internet service provider- ISP) और सरकारें नेट (government data) पर सभी डेटा को बराबर तवज्जो (equal weightage) दें.
  3. ऐसा न हो कि कोई सर्विस ‘स्लो लेन- slow lane’ में इसलिए अटक जाए क्योंकि उसके हिसाब से पैसे नहीं दिए गए.

आसान शब्दों में (in easy words) Telecom operators/ISPs के पास ताकत होगा की आप कितना इन्टरनेट एक्सेस (can access your internet) करेंगे, आप क्या एक्सेस करेंगे , कितनी स्पीड से एक्सेस करेंगे, कितना एक्सेस करेगे, किसी वेबसाइट को एक्सेस करने में कितने पैसे लगेंगे वगेरा वगेरा …

एक तरह से ISPs के पास ताकत होगी की आप NET पर कौन से कंटेंट (which content to see) देखे .

ये तो था Electricity से सम्बंधित (related), अब मान लीजिये ये ही Internet के साथ भी हो जाये तो जिसमे आपको Whatsapp Facebook Google इत्यादि पे जाने के लिए अलग चार्ज (different charges) हो और कम प्रसिद्ध साईट (less famous website) पर जाने के अलग चार्ज हो | एक तरह से हम कह सकते हैं की अब internet की जगत में भी जातिवाद शुरू हो रहा हैं जहां टॉप की websites ब्राह्मण और और नए websites शुद्रो की जाति में विभाजित (divided into casts) हो सकता हैं

 न्यूट्रलिटी कहता है कि : Neutrality kehta hai ke

-सारे साईट सामान भाव से सबको उपलब्ध (all sites available equally) हो

-सामान स्पीड (equal speed) से साईट को एक्सेस (site access) करने मिले

-सामान डेटा चार्ज हर site के लिए

यह बिमारी फैली कहाँ से ? Yeh bimari kaha kaha expand hui hai ?

कुछ युगों पहले, Airtel नामक एक दूरसंचार प्रदान (telecom company) करने वाली प्राइवेट कंपनी (private company) ने Viber,Skype इत्यादि के माध्यम (medium) से किए गए फोन कॉल के लिए उच्च टैरिफ चार्ज (high traffic charge) करने की कोशिश की। इस तरह इन्होने नेट न्यूट्रलिटी सिद्धांत का उल्लंघन (breaking the law) करने की कोशिश की | लोगो के आक्रोश के कारण बाद में Airtel को पेसे कमाने का यह तरीका वापस बंद (take the service back) करना पड़ा |

SEMrush

हाल ही में एयरटेल ने फिर Airtel Zero नामक एक नयी सेवा का उदघाटन (started new service) किया जिसमे कुछ websites को फ्री कर दिया गया . अगर कोई उपभोगता (user/ visitor) इन sites पर जाता है तो उसके पेसे वह वेबसाइट देगा. यह भी नेट न्यूट्रलिटी सिद्धांत (net neutrality rule) का उल्लंघन कर रहा हैं.

क्या फायदे क्या नुक्सान ? What are the profit loss of this ?

मान लीजिये की ISPs/Telco’s को यह ताकत मिल जाये

– बड़ी बढ़ी कंपनिया (big companies) पैसो के जोर पर इन सर्विस प्रदान करने वाली कंपनियों से गठबंधन (partnership with company) कर लेगी ताकि उनके websites को फ्री में लोगो को दे सके और कमाई कर सके. चूँकि आपको ये फ्री में मिल रहा हे तो आप दो बार सोचेंगे की डेटा प्लान ले या नहीं (you want to take data plan or not) . हालकी आपको ये सर्विस फ्री में मिल जाएगी पर दूसरे जो उभरते हुए websites या कंपनिया इस दौड़ में पैसे की कमी की वजह से पीछे हो जाएगी या उठ ही नहीं पायेगी  क्योंकि उनके sites आप डेटा प्लान (data plan) न होने की वजह से नहीं देख पा रहे या ISPs ने उन्हें Block कर दिया होगा .

– अब अगर छोटी कंपनियों (small companies) ने थोड़ा बहुत पैसा देकर ISPs को मना भी लिया तो हो सकता है आपको उन सेवाओ का उपयोग (using of services) करने के लिए कम स्पीड मिले. मतलब ज्यादा पैसा देने वाली कम्पनी को ज्यादा स्पीड मिलेगा (more speed to those companies who pays more) बाकि को उनके पैसे देने की क्षमता के हिसाब से स्पीड .

– अलग कम्पनियां (different companies) अलग अलग ISPs/टेलिकॉम ऑपरेटर (telecom operator) से गठबंधन करेगी . उदहारण के लिए whatsapp आपको वोडाफ़ोन पर फ्री (free on vodafone) मिलेगा तो facebook एयरटेल पर मिलेगा इत्यादि . अंत में उपभोगता को परेशानी (in the end problem for client).

अंततः इन्टरनेट की स्वतंत्रता खतरे में हैं.

टेलीकॉम कंपनियां स्काइप और वाइबर (skype and viber) के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए अब वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (voice over internet protocol-वीओआईपी) सेवाओं के लिए कस्टमर से अलग से चार्ज (different charges from customer) लेना चाहती हैं. इस मसले पर ट्राई जहां डिस्कशन पेपर (discussion paper) लाने की तैयारी में है. वहीं, डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम (department of telecom) नेट न्यूट्रलिटी को बरकरार रखना चाहता है.

नये नियम (new rules) मुताबिक ये सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी कंटेंट को ब्लॉक नहीं (never block the content) किया जाएगा.

इंटरनेट को इस आधार पर न बांटा जाए कि पैसा देकर इंटरनेट और मीडिया कंपनियां फास्ट लेन (fast lane by internet and media company) पा लें और बाकी लोगों को मजबूरन स्लो लेन (slow lane for others) मिले.

SEMrush
x

Check Also

जाने अच्छी सेल्फी लेने के 10 सबसे बदिया टिप्स , 10 best tricks to take good selfie

जाने अच्छी सेल्फी लेने के 10 सबसे बदिया टिप्स | 10 best tricks to take good selfie

जाने अच्छी सेल्फी लेने के 10 सबसे बदिया टिप्स | 10 best tricks to take ...